चम्बा ! ज़मीदोज़ होने की कगार पर पहुंचा कल्हेल पंचायत का कलेरा गांव !

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चम्बा ! चम्बा जिला कि कल्हेल पंचायत के कलेरा गांव के लोग आज भूस्खलन की वजह से दहशत के साये में अपने दिन गुजार रहे हैं। दरअसल आज से करीब 3 साल पहले कलेरा गांव के साथ सड़क निर्माण का कार्य किया गया था जहां पर सड़क के किनारे सुरक्षा दिवार लगाए जाने थी लेकिन ठेकेदारों की लापरवाही के चलते यहां भूस्खलन शुरू हो गया जिसकी वजह से साथ लगते कलेरा गांव के घरों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई।

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जब भी कोई सड़क निर्माण कार्य किया जाता है तो उस समय इस बात का ख्याल रखना होता है कि आसपास के गांव के लोगों को या उनकी उपजाऊ जमीन को कोई खतरा नहीं होना चाहिए। लेकिन कई जगह पर देखा गया है कि ठेकेदारों की मनमानी और लापरवाही की वजह से वहां के गांव के लोगों के घरों को तो खतरा होता ही है साथ ही उनके खेतों में भी मलवा फेंककर उन्हें बर्वाद कर दिया जाता है।

ऐसा ही एक मामला यहां कल्हेल पंचायत के कलेरा गांव में देखने को मिल रहा है जहां पर आज यह ग्रामीण मौत के साए में रहने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इन लोगों ने इस अपनी समस्या के लिए प्रशासन या पंचायत प्रतिनिधियों को अवगत ना करवाया हो लेकिन पिछले 3 सालों से इनकी इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया।

जैसे-जैसे बारिश का मौसम नजदीक आता जा रहा है यहां के ग्रामीणों की चिंताएं और भी बढ़ती जा रही हैं। प्रशासन मानो ऐसे इंतजार कर रहा है कि यहां कोई बड़ा हादसा हो और उसके बाद ही इन लोगों की यह समस्या का हल किया जाए।

यहां के स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके गांव के नीचे सड़क निर्माण कार्य किया गया था। जहां पर सुरक्षा दिवार लगाई जानी थी कुछ एक जगह पर तो वहां डंगे लगाए गए लेकिन वह गांव की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि अगर यहां पर पक्के डंगे लगाए जाएं तभी यह भूस्खलन रुक सकता है वरना किसी ना किसी दिन उनका पूरा गांव जमींदोज़ हो सकता है और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी क्योंकि उन्होंने पहले सरकार को इसके लिए अवगत करा दिया है।

वही यहां की नवनिर्वाचित वार्ड मेंबर ने भी बताया कि उनके गांव में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों की लापरवाही की वजह से आज यह दिन देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि कई बार प्रशासन से इसके लिए गुहार लगा चुके हैं लेकिन उनकी इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने एक बार फिर प्रशासन और सरकार से आग्रह किया है कि उनके गांव को बचाना है तो यहां पक्के डंगे लगाए जाएं ताकि उन्हें और उनके गांव के लोगों को किस तरह का खतरा न हो।

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