चम्बा ! छोटे से कमरे में कैद हो कर रह गई 35,लाख की सिंचाई परियोजना।

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चम्बा ! प्रदेश सरकार लोगों से टैक्स के रूप में पैसों को वसूलते हुए उन्ही पैसों से लोगों को किसी न किसी स्कीम को लगाते हुए फायदा दिलवाने का प्रयास तो करती है पर वह पैसा सही मायने में ठीक जगह में लग भी रहा है या नहीं इसका कोई ख्याल नहीं रखता है। ऐसा ही एक मामला सरोल गांव मे देखने को मिला।

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इसमे प्रदेश सरकार ने तो ग्रामीणों की सुविधा के लिए लाखो रूपये भले ही खर्च कर दिए है पर धरातल में सरकार द्वारा चलाई गई इस स्कीम की कैसे धज्जियां उड़ाई जा रही है इसका जीता जागता उदाहरण सरोल गांव के साथ रावी नदी के किनारे देखा जा सकता है । विभाग द्वारा बनाई गई लगभग 35,लाख की सिंचाई परियोजना जो कि लोगों के हितों को देखते हुए चलाई गई थी पर आज वह परियोजना एक छोटे से कमरे में कैद होकर रह गई है।

बताते चले कि पानी लिफ्ट करने को लगाई गई बड़ी बड़ी मोटरे जो कभी इस परियोजना को चलाने के लिये बहुत उपयोगी हुआ करती थी पर आज वही लाखो रुपयों की बेशकीमती मशीनरी विभाग की अनदेखी के चलते पड़े पड़े सड़ रही है।

रावी नदी के किनारे झाड़ियों में हल्के हल्के दिखाई दे रहे लोहे के यह वही बड़े-बड़े खम्बे है जिन पर कभी सरोल पंचायत के हजारों ग्रामीण किसानों को खेती बाड़ी करने के लिए पानी की सहायता मिला करती थी पर आज के दौर में यह लोहे के खम्बे और सिंचाई के लगाई गई पाइपें सालों से सर्दी गर्मी के थपेड़ों की मार झेलते हुए सड़ने लग पड़े है।

गांव सरोल के लोगों ने बताया कि यह परियोजना सिंचाई के लिए बनाई गई थी और इस पर विभाग ने 35 लाख से ऊपर रूपये भी खर्च किये थे पर यह परियोजना दो से तीन महीनों से ज्यादा नहीं चली। उन्होंने बताया कि इसके इस्तेमाल के लिए लगाई गई पाइपें नई है अगर इसमें थोड़े से पैसों का खर्च और कर दिया जाये तो इस योजना का लाभ बनने वाले मैडिकल कॉलेज को तो होगा ही वंही स्थानीय ग्रामीण लोगों को इसका भरपूर फायदा मिलेगा।

इनका कहना है कि यंहा इन गांव में पानी की बहुत समस्या है और अगर इसमें थोड़ा सा खर्चा किया जाये तो यंहा पर किसानो को भी इससे फायदा मिलेगा और पर्यटन को भी इससे फायदा पहुंच सकता है।

यंहा के स्थानीय ग्रामीण किसानो का कहना है कि रावी नदी से की गई पानी लिफ्टिंग स्कीम हमारे गांव के लोगों को दी गई थी वह शुरू में एक दो साल तो चली पर उसके बाद वह बिलकुल ही बंद हो गई थी। इन लोगों का कहना है कि अगर बंद पड़ी यह स्कीम फिर से चालू हो जाती है तो हम जमींदार लोग खेतीबाड़ी के साथ ताजी सब्जी का भी उत्पादन कर सकते है।

इन लोगों ने बताया कि हमारे इस गांव में एक मात्र वाटर सप्लाई वालों का ही पानी आता है वह भी कभी कभी अगर यंहा पर यह स्किम फिर से शुरू हो जाती है तो इससे ग्रामीणों को काफी फायदा हो सकता है।

वर्षो से बदहाली के दल-दल में फंस चुकी यह परियोजना कब शुरू हो सकती है इसको लेकर हमारी टीम ने जल शक्ति विभाग चम्बा अधिषाशी अभियन्ता के कार्यालय पहुंची और इस बारे जानने का प्रयास किया तो उन्होंने बताया कि यह एक किसानों के लिए चलाई गई सिंचाई योजना थी और उस समय भूमि बिजाई के लिए एरिया भी काफी था पर आज यंहा निजी तौर पर लोगों ने काफी निर्माण कर लिया है और भूमि घट चुकी है और जिनके पास थोड़ी बहुत जमीने बची वंहा कोई भी खेतीबाड़ी नहीं करता है।

उन्होंने बताया कि जमीन कम होने के चलते बिजली का मीटर तक नहीं लगाया जा सकता है क्योंकि उसका खर्चा कोन देगा और यह ऑडिट पहरा भी बन जाता है। पूछने पर उन्होंने बताया कि फार्मर अगर अपनी जमीन की सिंचाई के लिए इसकी मांग करता है तो इसे अवश्य चलाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि रावी नदी के इस पानी में सिल्ट की मात्रा बहुत ही ज्यादा है इसलिए यह यह पानी पिने के उपयोग में नहीं लाया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इसी पानी को अगर पीने योग्य बंनाना है तो विभाग इसके लिए प्रयास जरूर कर सकता है।

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