शिमला में मातृभाषा दिवस पर साहित्य संवाद तथा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया !

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शिमला ! अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी शिमला द्वारा रोटरी टाउन हाल शिमला में साहित्य संवाद तथा कवि सम्मेलन का आयोजन शिखर सम्मान प्राप्त लेखक सुदर्शन वशिष्ठ की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस अवसर पर डा इंद्र सिंह ठाकुर, डॉ अनुराग विजयवर्गीय न अपने वक्तव्य में कहा कि मातृभाषा सभी के लिए संस्कार और शिक्षा प्रदान करने का सबसे सशक्त माध्यम है अतः मातृभाषा का सम्मान अवश्य होना चाहिए। उन्होंने बताया कि विश्व का सबसे लोकप्रिय साहित्य मातृभाषा में ही लिखा गया है जो बाद में अन्य भाषाओं में अनुवाद होकर प्रसिद्ध हुआ है।

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इस कार्यक्रम में पहाड़ी के कवि देव राज संसालवी द्वारा लिखित दो पुस्तकें हिमाचली कविता और का लोकार्पण किया गया। इन पुस्तकों की समीक्षा करते हुए लेखकों ने कहा कि वर्तमान में लोक संस्कृति और हिमाचली भाषा का संरक्षण, प्रकाशन तथा प्रचार प्रसार अत्यंत जरुरी है ताकि पारंपरिक संस्कृति और पहाड़ी भाषा को बचाया जा सके। इस अवसर पर शिमला के स्थानीय कवि जनों ने अपनी अपनी रचनाओं का पाठ करते हुए वर्तमान सामाजिक विसंगतियों, विषमताओं और कोरोना महामारी से संत्रस्त मानवीय जीवन के विभिन्न पहलुओं को अपनी कविताओं का विषय बनाया। आज के कवि सम्मेलन में साक्षी शर्मा, सुदर्शन वशिष्ठ, अश्विनी गर्ग, नरेश देओग, सतीश शर्मा, नरेंद्र शर्मा, गुप्तेश्वर नाथ , डॉ अनुराग विजयवर्गीय, अविनाश कुमार , रोशन लाल पराशर, उमा ठाकुर कल्पना गांगटा, धर्मपाल भारद्वाज, देवराजसंसालवी, वंदना राणा, ओम प्रकाश शर्मा हितेंद्र शर्मा, राहुल प्रेमी,आंचल भंडारी तथा अन्य कवियों ने भाग लिया।

इस अवसर पर अकादमी के सचिव डॉ कर्म सिंह ने कहा कि हिमाचल अकादमी द्वारा पहाड़ी भाषा और साहित्य की स्थाई समिति का गठन पूरा कर लिया गया है और इस समिति में हितेंद्र शर्मा तथा साक्षी शर्मा को सदस्य मनोनीत किया गया है। उन्होंने बताया कि लाकडाउन के दौरान अकादमी मई 2020 से हर रोजाना 1 घंटे का साहित्य कला संवाद कार्यक्रम का लाइव प्रसारण कर रही है और यह कारवां अभी भी निरंतर गतिशील है । उन्होंने बताया कि अकादमी साहित्य संस्कृति भाषा और कला के प्रोत्साहन और सम्मान के लिए कार्यरत है। उन्होंने बताया कि पहाड़ी भाषा के संरक्षण के लिए एन आई टी हमीरपुर के साथ सहयोग करते हुए कंप्यूटराइज्ड अनुवाद के लिए कांगड़ी से हिंदी तथा अंय भाषाओं में अनुवाद के लिए डिवाइस भी तैयार किया जा रहा है और इसी तरह प्रदेश की अन्य बोलियों पर भी डिवाइस तैयार करके अनुसंधान का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा ।

समारोह के अध्यक्ष सुदर्शन वशिष्ठ ने कहा कि भारत मे अनेक भाषाएँ प्रचलित हैं। भाषा के माध्यम से ही किसी भी देश की संस्कृति जनजीवन और परंपराओं को जाना जा सकता है। इस दृष्टि से मातृभाषा का विशेष महत्व है। वर्तमान में आंचलिक भाषाओं का क्षरण हो रहा है । विश्व के मानचित्र से कुछ भाषाएँ समाप्त होती जा रही है। अतः मातृभाषा का प्रोत्साहन और सम्मान जरूरी है।

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