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शिमला , 02 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 केंद्र सरकार का ऐतिहासिक कदम है जिसके लिए है हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं समस्त केंद्र नेतृत्व की दीर्घकालिक दृष्टि से लिया गया निर्णय का स्वागत एवं अभिनंदन करते है। उन्होंने कहा कि संशोधन का उद्देश्य उम्मीद सुधार- अर्थात एकीकृत वक्फ प्रबंधन, वक्फ संस्थानों का सशक्तीकरण, प्रौद्योगिकी के माध्यम से दक्षता में वृद्धि, वक्फ संपत्तियों का सतत विकास करना है। उपर्युक्त चुनौतियों के आधार पर, 2024 में संशोधन विधेयक में प्रगतिशील सुधार पेश किए गए, जिनमें ट्रस्टों को वक्फ से अलग करना यानी किसी भी कानून के तहत मुस्लिमों द्वारा बनाए गए ट्रस्टों को वक्फ नहीं माना जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि व्यक्तियों का अपने ट्रस्टों पर पूर्ण नियंत्रण बना रहे। दूसरा प्रौद्योगिकी को लागू करना जिसमें वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को वैज्ञानिक, कुशल और पारदर्शी बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का कार्यान्वयन तीसरा एक केंद्रीय पोर्टल की स्थापना जिसमे पंजीकरण, लेखा और लेखा परीक्षा, अंशदान और मुकदमेबाजी सहित वक्फ संपत्तियों के पूरे कालचक्र को स्वचालित करना। उन्होंने कहा कि मुस्लिम धर्म का पालन करने वाले व्यक्ति द्वारा वक्फ संपत्ति का समर्पण जिसके अंतर्गत केवल वही व्यक्ति अपनी संपत्ति वक्फ को समर्पित कर सकता है जो कम से कम 5 वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहा हो। इससे 2013 के संशोधन से पहले की स्थिति काफी हद तक बहाल हो जाएगी, जिसमें वक्फ करने के हकदार व्यक्ति को "इस्लाम को मानने वाले किसी भी व्यक्ति" से बदलकर "कोई भी व्यक्ति" कर दिया गया था।'वक्फ द्वारा उपयोगकर्ता' संपत्तियों का संरक्षण जिसमें वक्फ बोर्ड के पास पहले से पंजीकृत संपत्तियां तब तक पंजीकृत रहेंगी, जब तक कि वे विवादित न हों या सरकारी भूमि के रूप में पहचानी न गई हों।
शिमला , 02 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 केंद्र सरकार का ऐतिहासिक कदम है जिसके लिए है हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं समस्त केंद्र नेतृत्व की दीर्घकालिक दृष्टि से लिया गया निर्णय का स्वागत एवं अभिनंदन करते है।
उन्होंने कहा कि संशोधन का उद्देश्य उम्मीद सुधार- अर्थात एकीकृत वक्फ प्रबंधन, वक्फ संस्थानों का सशक्तीकरण, प्रौद्योगिकी के माध्यम से दक्षता में वृद्धि, वक्फ संपत्तियों का सतत विकास करना है। उपर्युक्त चुनौतियों के आधार पर, 2024 में संशोधन विधेयक में प्रगतिशील सुधार पेश किए गए, जिनमें ट्रस्टों को वक्फ से अलग करना यानी किसी भी कानून के तहत मुस्लिमों द्वारा बनाए गए ट्रस्टों को वक्फ नहीं माना जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि व्यक्तियों का अपने ट्रस्टों पर पूर्ण नियंत्रण बना रहे।
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दूसरा प्रौद्योगिकी को लागू करना जिसमें वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को वैज्ञानिक, कुशल और पारदर्शी बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का कार्यान्वयन तीसरा एक केंद्रीय पोर्टल की स्थापना जिसमे पंजीकरण, लेखा और लेखा परीक्षा, अंशदान और मुकदमेबाजी सहित वक्फ संपत्तियों के पूरे कालचक्र को स्वचालित करना।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम धर्म का पालन करने वाले व्यक्ति द्वारा वक्फ संपत्ति का समर्पण जिसके अंतर्गत केवल वही व्यक्ति अपनी संपत्ति वक्फ को समर्पित कर सकता है जो कम से कम 5 वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहा हो। इससे 2013 के संशोधन से पहले की स्थिति काफी हद तक बहाल हो जाएगी, जिसमें वक्फ करने के हकदार व्यक्ति को "इस्लाम को मानने वाले किसी भी व्यक्ति" से बदलकर "कोई भी व्यक्ति" कर दिया गया था।
'वक्फ द्वारा उपयोगकर्ता' संपत्तियों का संरक्षण जिसमें वक्फ बोर्ड के पास पहले से पंजीकृत संपत्तियां तब तक पंजीकृत रहेंगी, जब तक कि वे विवादित न हों या सरकारी भूमि के रूप में पहचानी न गई हों।
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