हम कोरोना के संक्रमण में जीने को अभिशप्त हैं, कैसे पाएंगे मुक्ति ?

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सांकेतिक चित्र
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संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना ने अब स्पष्ट कर दिया है कि विश्व कोविड-19 के दूसरे दौर से गुजर रहा है, अभी इस महामारी से मुक्ति नहीं हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकलन के अनुसार वर्ष 2021 के उत्तरार्ध में इस महामारी का कुछ हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। उनका मानना है कि हमें कोविड-19 के साथ जीने के लिए अपने आप को ढालना होगा ।अमेरिका ब्रिटेन फ्रांस इटली जैसे देश जी जान से महामारी के विरुद्ध जंग छेड़े हुए हैं। ब्रिटेन में लगे 4 हफ्ते के लोक डाउन के बाद ऐसी उम्मीद की जा रही है कि कोरोना महामारी फैलने के डर रहे कुछ कमी आएगी। जिस तरीके से यहां महामारी भारत में फैल रही है वह गंभीर चिंता का विषय है। भारत में कल तक के आंकड़ों के अनुसार 95,34,964 लोग संक्रमण ग्रस्त हुए, 89,73,373 लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिला, 1,38.648 लोगों को अपना जीवन गंवाना पड़ा जो की बहुत ही दुखद स्थिति है। इस महामारी के प्रकोप से ज्यादा ग्रसित  दिल्ली, मुंबई अहमदाबाद, फरीदाबाद जैसे बड़े नगर है।

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इसी प्रकार हिमाचल प्रदेश में 47227 मामलों की पुष्टि की गई, जिनमें से 8217 सक्रिय मामले रह गए है , जबकि 33336 लोग स्वस्थ हुए है और 667 लोगों को अपना जीवन गंवाना पड़ा । खेद है कि 8217 लोग अभी अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं और हम कामना करते हैं कि वह जल्दी स्वस्थ हो। यह आंकड़े हिमाचल प्रदेश के प्रत्येक जिले से स्वयंसेवीओं के एक समूह ने एकत्र किए जो राज्य स्तरीय स्वास्थ्य बुलेटिन और अन्य स्त्रोतों से पुष्ट हैं व covid19.org उपलब्ध है। इन आंकड़ों के विवरण जिला वार भी दिए गए हैं। शिमला, लाहौल स्पीति, कुल्लू, मंडी, हमीरपुर और कांगड़ा जिला में हालात खराब होते जा रहे हैं। जनसंख्या के आधार पर देश के कोरोना प्रभावित 16 ग्रामीण जिलों में जिला शिमला सबसे ऊपर आ गया है। शिमला में सक्रिय मामलों का आंकड़ा 2000 के पार हो गया है और मौत 165 लोगों की हुई है। प्रदेश सरकार ने भी अपने कोरोना पर लगाम लगाने के प्रयास तेज कर दिए हैं तथा प्रतिदिन लगभग 6000 से अधिक सैंपल लिए जा रहे हैं।

इस संदर्भ में सरकार का मानना है कि 15 दिनों के भीतर स्थिति को नियंत्रण में लाया जाएगा। अब इस संक्रमण ने शहरों से निकलकर अर्ध शहरी इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी खेलना आरंभ कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी कम है। हिमाचल सरकार अपनी ओर से जो भी संभव बन पा रहा है कर रही हैं। हम यह मानते हैं कि कोरोना संक्रमण पर कोई राजनीति ना हो सारे दल व सरकार मिलकर संगठित रूप से कोविड-19 से लड़ने की एक विस्तृत योजना तैयार करें। अभी भारत में कोरोना वैक्सीन की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। लेकिन विदेशों में फाइजर द्वारा निर्मित कोविड-19 वैक्सिन 5 दिसंबर से मिलने आरंभ हो जाएगी और फिर सिर्फ एक टीम को काफी प्रभावशाली माना गया है। भारत में अभी ऐसा कुछ नहीं हुआ है। हमें कोरोना के साथ जीना है व कोविड-19 के लिए सरकार द्वारा निर्धारित नियमों, उन का पालन करते हुए महत्वपूर्ण मूल मंत्र याद रखेंगे होंगे।

अगर हम जागरूक हैं तो जाहिर है कि कोरोना वायरस हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगा। मास्क का प्रयोग, नियमित दूरी बनाए रखना, थोड़ा सा अस्वस्थ होने पर अपनी चिकित्सा जांच करवाना, अंदर बाहर आते जाते घर आकर हाथ धोना और रोज गर्म पानी से गरारे करना ताकि किसी भी स्थिति में गला प्रभावित ना हो और बुखार की स्थिति में नियमित दवा लेना और बुखार की जांच करते रहना। अनावश्यक घूमना भीड़ से बचना भी जरूरी है हाथ मिलाने की संस्कृति अब विदेशों में भी खत्म होती जा रही है नमस्कार कीजिए । एक बार फिर हम कहना चाह रहे हैं कि हमें सब सावधानियां बरतते हुए संगठित होकर कोरोना को फैलने से रोकना होगा ,वायरस पर लगाम लगानी होगी और कोरोना के रहते हुए ही जीना होगा।

रामा नन्द ठाकुर !

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