लाहौल ! जहाँ मां मिंधलवासिनी के कोप से बचने के लिए आज भी एक बैल से करते है खेतों की बिजाई !

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लाहौल ! जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी के मिंधल पंचायत में मां मिंधलवसिनी के प्रति लोगों की अटूट आस्था है ! एक मान्यता के अनुसार क्षेत्र में मां मिंधलवसिनी का श्राप है कि दो बैलों की जोताई से खेती करेंगे तो एक बैल की मौत हो जाएगी ! यहां महिलाएं ना तो चरखा कातती है और ना ही लोग रस्सी के बनी चारपाई पर सोते है । एक समय था जब हिमाचल में तकरीबन हर घर में बैलों की जोड़ी हुआ करती थी और लोग बैलों से खेतों की जोताई करते थे ! ट्रेक्टर और अब पॉवर टिलर आने से बैलों का पालन पोषण बंद हो गया है ! अब प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में भी दूर दूर तक बैलों की जोड़ी देखने को नहीं मिलती है !

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इक्का दुक्का होगा जो बैलों से खेती करते है। लेकिन पांगी घाटी के मिधल पंचायत में आज भी बैल से खेती होती है ! ऐसा करना वहाँ के लोगों का पिछड़ेपन के कारण नहीं बल्कि देवी के कोप से बचने के लिए सदियों से किया जा रहा है ! मिंधल माता मन्दिर के पुजारी श्री राम ने बताया कि मिंघल माता ने गांव को एक श्राफ व एक वरदान दिया हुआ है ! मिंधल गांव में एक बैल की खेती करना वरदान है।

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