शिक्षक दिवस पर अध्यापकों को नमन करते हुए, शिक्षक दिवस पर विशेष – देवेंद्र धर ।

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अपने माता-पिता के बाद आजीवन अगर कोई व्यक्ति किसी को याद करता है तो वह उसका शिक्षक ही है, चाहे शिक्षक को छात्र याद रहे ना रहे। उसका अध्यापक उसके मन में, उसके मस्तिष्क में ‘हॉंट’ करता रहता है। इस दिन को लेकर हम कोई व्याख्यान देने वाले नहीं है, ना ही कोई दिशा देने वाले हैं। हम सिर्फ अपना कर्तव्य समझते हैं कि अध्यापक का समाज के प्रति जो दायित्व है, जो दिशा वे हमारे जीवन को देते हैं, इस अवसर पर उनका सम्मान करना बहुत जरूरी है। गुरु के महत्व को सभी जानते हैं तभी तो कहा जाता है !

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गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाँये,
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताए।

भगवान,खुदा,वाहे गुरू,क्राईस्ट तक पंहुचने के लिये भी भक्ति मार्ग भी गुरू के पास ही है। सारा देश जानता है कि आज शिक्षक दिवस है। यह वह दिवस है जब शिक्षकों का सम्मान किया जाता है वह उनकी प्रतिष्ठा में अलग-अलग समारोह आयोजित कर समाज को दी गई सेवाओं का स्मरण किया जाता है। यह दिवस देश-विदेश में हर साल ऩियत तिथियों पर मनाया जाता है। भारत में पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के अवसर पर मनाया जाता है। वे एक महान शिक्षक थे।इसके साथ ही वे स्वतंत्र भारत के पहले उप राष्ट्रपति रहे। इस अवसर पर स्कूलों में विभिन्न समारोह किए जाते हैं व राज्य स्तर पर सरकार द्वारा नियत व चयनित अध्यापकों को पुरस्कार भी दिए जाते हैं। स्कूल बंद पड़े हैं तो “कोरोना काल” में शिक्षकों को कैसे याद किया जाए, जिनकी वजह से जीवन को एक दिशा मिलती रही है। अलग-अलग देशों में शिक्षक दिवस अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाते हैं।

लगभग 100 सौ से अधिक राष्ट्र अलग-अलग तिथियों पर शिक्षक दिवस मनाते हैं। शिक्षक दिवस की स्थापना, समाज में शिक्षक की भूमिका को स्वीकार करने व पहचानने के लिए यूनेस्को ने 1944 में पहल की थी और विश्व शिक्षक दिवस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। वैश्विक शिक्षक महासंघ हर वर्ष से मना रहा है। अध्यापक जो भी हो, जैसा भी हो शिक्षक, छात्र का आदर्श रहता है और छात्र उसकी ओर बहुत ही संवेदनशीलता से, अर्थ पूर्ण भाव से देखता रहता है।

अध्यापन की इस प्रक्रिया में, शिक्षक से उम्मीद की जाती है कि उसका दृष्टिकोण छात्रों के प्रति, पंचकोणीय होना चाहिए। अध्यापक अपने छात्रों को ऊपर की तरफ, नीचे की तरफ, दाएं, बाएं, आगे और पीछे,पांच दृष्टि से देखें ताकि उसके शिष्य के जीवन का सर्वांगीण विकास हो सके। अपने छात्र को लंपट या बदतमीज कहकर बात को खत्म कर देना, अध्यापक की संवेदनशीलता का प्रतीक नहीं है। निसंदेह कुछ छात्र ऐसे हो सकते हैं जो अध्यापकों का सम्मान न करें या उनके व्यवहार ठीक ना हो। उन छात्रों की तुलना सभी छात्रों के साथ नहीं की जा सकती है। छात्र किस वर्ग,समुदाय से है या जानना एक अध्यापक के लिये जरूरी है। इसी प्रकार एक अध्यापक जो मात्र वेतन के लिए छात्रों को पढ़ाता है उसकी तुलना सभी अध्यापकों से नहीं की जा सकती।शिक्षक की भूमिका सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है जो हमें स्कूल कॉलेज या शिक्षक शिक्षा संस्थानों में पढ़ाते हैं, बल्कि हमारी जिंदगी में शिक्षक का रोल काफी अहम है। शिक्षक वह है जो हमें जीवन की पद्धति, जीवन जीने का उपहार देते हैं। गुरु की महिमा अपार है। गुरु और शिष्य रिश्ते में कहीं तल्खी आ सकती है। इसका मतलब यह कदापि नहीं लिया जाना चाहिए कि अध्यापक का हमारे जीवन में कोई महत्व नहीं होता। मेरे पास अपने अनुभव पर्याप्त हैं, जिन अध्यापकों ने मुझे पढ़ाया और मेरा मार्गदर्शन किया। शायद अध्यापन की प्रक्रिया खत्म होने के बाद मैं उनसे कभी मिला भी नहीं, ना ही मैं जान पाया कि वे कहां है, लेकिन आज भी कितने वर्ष गुजर जाने के बाद उन्हें याद करता हूं, नमन करता हूं, प्रणाम करता हूं।

सरकार द्वारा दिए गए पुरस्कार किसी अध्यापक की योग्यता क्षमता और कार्यकुशलता तय नहीं करती है। सरकारी पुरस्कारों को लेकर यदा-कदा सवाल उठते रहे हैं और आज उठ रहे हैं । शिक्षक की उपलब्धियां उसके परिवेश उसके समाज में देखी जा सकती हैं। जब खचाखच भरी बस में एक शिक्षक प्रवेश करता है तो एक सीट उसे बैठने के लिए मिल जाती है । जब एक शिक्षक घूम रहा होता है तो अचानक एक छात्र उसके चरण स्पर्श करता है। यह शायद वही छात्र हो सकता है जो अपने शिक्षक को उस समय ठीक से ना समझता हो। शिक्षकों का समर्पण भाव समाज करता है सरकारें नहीं। कुछ शिक्षक शायद आहत होते होंगे कि हमने इतनी मेहनत की बच्चों को जी जान से पढ़ाया, उन्हें सेवा में विस्तार नहीं मिला ना ही कोई सम्मान या प्रमाण पत्र। अध्यापकों का असली स्वरूप उनकी समाज में प्रतिष्ठा से जुड़ा है। अंग्रेजी में उन्हें “सोशल इंजीनियर” का जाता है चाहे वे किसी स्तर पर काम कर रहे हो। बच्चे के भविष्य को आकार देना, दिशा देना एक दीक्षित अध्यापक का कार्य होता है और वह करता भी है। इसका मतलब कतिपय यह नहीं लिया जाना चाहिए कि अध्यापक अपने शिष्यों के लिए गंभीर और संवेदनशील नहीं हैं। यदि इक्का- दुक्का पथभ्रष्ट हो भी जाएं तो अध्यापन को कम करके नहीं आंका जा सकता या समस्त अध्यापक समुदाय पर उंगली उठाना ठीक नहीं है।

मेरे आज के अस्तित्व के पीछे जो अध्यापक हैं इनको एक बार फिर नमन व साथ-साथ समस्त अध्यापक समुदाय को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।

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