करसोग ! किन्नौर से आई किसानों की टीम ने प्राकृतिक खेती के तरिके सीखे !

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करसोग ! सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को प्रदेश के लगभग 17000 गांवों में उपयोग में लाने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार वचनवद्ध है। रासायनिक खाद,रासायनिक कीट नाशकों से प्रभावित होती खेती व खाद्यान्नों, जल ,जंगल और जमीन को बचाने व सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की विधि सिखने के लिए किन्नौर जिला के विभिन्न खंडों से महिला किसानों का एक समूह  ए टी एम किन्नौर सौरभ बालिया के नेतृत्व में ऐतिहासिक नगरी पांगणा के पज्याणु गांव पहुंचा। 20 महिलाओ के इस समूह को अपने व अन्य किसानों के खेतों में ले जाकर लीना शर्मा ने कहा कि शिक्षा और जीवन का परस्पर अटूट संबंध है और शैक्षिक लक्ष्यों के अर्थों में वास्तव में इसकी कोई सीमा नहीं है।विशाल दृष्टिकोण से देखा जाए तो उम्र भर आदमी एक दूसरे से किसी न किसी विषय पर कुछ न कुछ सिखता ही है।प्राकृतिक कृषि और ग्रामीण विकास के लिए प्रतिबद्ध लीना शर्मा ने बताया कि लगभग एक वर्ष पूर्व वे भी अन्य किसानों की तरह खेती में रासायनिक खाद-दवा का प्रयोग करतीं थी।लेकिन जब उन्हें सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की जानकारी मिली तो उन्होंने इसे बड़ी संजीदगी से अमल में लाया।आज इसी का परिणाम है कि आप लोग किन्नौर से सुभाष पालेकर खेती सिखने पांगणा के पज्याणु गांव पहुंचे हैं।ऊन्होंने कहा कि यह सामाजिक परिवर्तन मेरी मानसिक शुद्धि और प्राकृतिक खेती की सफलता से आत्म तृप्ति और पज्याणु के सभी किसानों की संतुष्टि का सर्वाधिक सशक्त साधन बन गया है।

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किन्नौर से आए किसानों के दल ने लीना शर्मा से सुभाष पालेकर शून्य लागत प्राकृतिक खेती की बारीकियों के ध्यानपूर्वक सुना व जीवामृत,घन जीवामृत, दशपर्णी अर्क, सप्तधान्य बीजामृत, इत्यादि बनाना सीखा। किन्नौर से आये इन किसानो ने अपने गाव़ं में इस खेती को करने का संकल्प लिया । इस अवसर पर विषय वाद विशेषज्ञ रामकृष्ण चौहान व ए डी एम करसोग लेखराज, ए डी एम किन्नौर सौरभ वालिया उपस्थित थे।विषय वाद विशेषज्ञ रामकृष्ण चौहान का कहना है कि मास्टर ट्रेनर लीना शर्मा की मेहनत का ही परिणाम हैं कि दूर दूर से किसान शून्य लागत प्राकर्तिक खेती सिखने आज पज्याणु आ रहे हैं। पज्याणु गांव के किसानों ने भी इन किसानों के साथ अपने-अपने अनुभव साझा किये। इस अवसर पर एटीएम करसोग ने कहा कि सुभाष पालेकर खेती के टिकाऊ विकास के लिए प्राकृतिक मिश्रित खेती और इससे जुड़े विषयों को सिखने और अमल में लाने के लिए सबसे पहले प्राचीन पारंपरिक प्राकृतिक खेती को स्पष्टतया समझना होगा।जिसके लिए आज किन्नौर से आए इस दल को पज्याणु से बेहतर कोई स्थान पांगणा मे नहीं है।पज्याणु में मास्टर ट्रेनर लीना शर्मा का कार्य बहुत ही ज्यादा प्रशंसनीय है।इसमें संदेह नहीं कि अब पज्याणु के आस-पास छंडयारा, थाच,घाढ़ी,फेगल,पन्याड़ु के किसान भी सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की जरुरत को स्वीकार कर इसे अपना रहे हैं।पांगणा गांव के समाज सेवी डॉक्टर जगदीश शर्मा और व्यापार मंडल पांगणा के प्रधान सुमीत गुप्ता,विज्ञान अध्यापक अमर चंद शर्मा का कहना है कि लीना व पज्याणु वासियों की सफलता की यह गौरवपूर्ण कहानी अपने आप में एक मिसाल है।सुभाष पालेकर कृषि अपनाने वाले पज्याणु के किसानों ने आशा व्यक्त करते हुए बताया कि पांगणा पंचायत के अन्य गांवों के किसान,बागबान भी सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के महान कार्य के प्रति पूर्णतया समर्पित होकर सामुदायिक सहयोग से अपने जीवन को बचाने के लिए,संसार और सृष्टि को बचाने के लिए भावी पीढ़ी को लीना शर्मा के पदचिन्हों पर चलकर पूरी पांगणा पंचायत ही नहीं अपितु पूरे हिमाचल को विषमुक्त खेती की दिशा में सार्थक प्रयास कर हमें निरंतर सहयोग व प्रोत्साहन जारी रखना होगा।ताकि पांगणा पंचायत में लीना द्वारा सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की यह पहल भविष्य में बहुत दूर तक मददगार सिद्ध हो।इस अवसर पर किन्नौर के यूला गांव की राजकुमारी, ज्ञान देवी,किरन,सुंगरा गांव की सुदेश कुमारी, जय प्रभा,देव कुमारी, मनोहर देवी,सुनीता, जनता नेगी,चौरा से राधिका नेगी,सीता देवी,सुदर्शना, पूर्णभक्ति तथा ज्योरी से छेरिंग डोलमा, लीला देवी,कृष्णा, रामप्यारी और मनीषा नेगी ने कहा कि उन्हें लीना शर्मा व कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती से संबंधित जानकारी बहुत प्रेरणादायक लगी तथा इस कार्य को पूर्ण ऊर्जा तथा चेतना के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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